JAMUI- सोनो क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण अयस्क भंडार (44%) मिलने से लोगों में एक बार फिर से खुशी की लहर है। 223 मिलियन टन स्वर्ण धातु उपलब्ध होने से उम्मीद जगी है कि इस इलाके के लोगों की तकदीर बदल जाएगी, लेकिन सोने क्षेत्र के लोगों के लिए यह खुशी और उम्मीद नई नहीं हैं। इससे पहले भी वह इस इलाके में स्वर्ण भंडार होने की बात से अवगत हो चुके हैं। लोगों ने बताया कि 15 साल पहले सर्वेक्षण के लिए कोलकाता से एक टीम आई थी तब सोना के साथ और भी दूसरे खनिज मिलने की बात कही गई थी। दावा है कि यहां से 8 KM की परिधि में मिट्टी में चमकीले खनिज पाए जाते हैं, जो सोना है।

10 फीट खुदाई पर ही लोगों को चमकीले खनिज मिले थे
‘1982 में यहां सोना पाए जाने की खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में थी। यह भी कहा जाता है कि इस दौरान इलाके के कुछ लोग रातों-रात लखपति भी बने गए थे। वे रात में ही खुदाई करने लगे थे। करीब 10 फीट खुदाई पर ही लोगों को चमकीले खनिज मिले थे। हालांकि, जब खुदाई की भनक प्रशासन को लगी तो करमटिया को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया।’

1982-1986 तक खुदाई का काम चला था
उन्होंने बताया, ‘1982-1986 तक भू-वैज्ञानिकों के निर्देश पर करमटिया में खुदाई का कार्य युद्ध स्तर पर चला था, लेकिन तब स्वर्ण की औसत सांद्रता कम पाई गई। खुदाई में खर्च भी काफी आ रहे थे। इसलिए तत्काल कार्य बंद दिया गया। इससे लोग काफी निराश हुए। पुनः 2010- 2011 में खुदाई का कार्य एक बार फिर शुरू किया गया था। इस समय भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पटना ने भी माना था कि क्षेत्र में स्वर्ण की असीम संभावना है। यहां के पत्थरों के दो टुकड़े संग्रह किए गए थे उसमें 50 पीपीबी से 1.25 पीपीएम तक सोने का सेरुजीनियस कवाजटाइंग होने का प्रमाण है। सोने की प्रचुरता होने के प्रमाण के बावजूद यहां खुदाई नहीं हुई।’

1996 में तत्कालीन खनन मंत्री ने खुदाई की बात की थी
1996 में देश के तत्कालीन खनन मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान ने सोनो हाई स्कूल मैदान में एक जनसभा कर खुदाई की बात की थी। खनन हुआ भी और बंद हो गया। फिर कोई फायदा नहीं हुआ। आज भी करमटिया उदासीन है। केंद्रीय मंत्री ने फिर खनन की मुहर लगा दी है तो ग्रामीणों में खुशी है। अभी यह भूमि बंजर है।

छोटे-छोटे चमकीले कण मिलते थे

सरपंच चंद्रदेव पासवान ने बताया, ‘1980-85 में हम लोग जब घूमने और खेती-बाड़ी करने के लिए करमटिया जाते थे तब मिट्टी में छोटे -छोटे चमकीले कण दिखते थे। इसे नदी में धोने के बाद सोनार के पास ले जाते थे तो पता चलता था कि स्वर्ण अयस्क है।’ विष्णु देव यादव ने बताया, ‘जब हम 20-21 साल के थे तब देखे थे कि करमटिया में सरकार ने खुदाई कराई थी। पूछे जाने पर पता चला था कि यहां सोना का भंडार मिला है। जिससे हम लोगों में काफी खुशी भी हुई, पर हुआ कुछ नहीं। अब फिर से करमटिया सुर्खियों में आया है। उम्मीद है खुदाई से इस गांव का भला हो।’

केंद्र ने लोकसभा में किया है खुलासा
बता दें, बुधवार को सांसद डॉ. संजय जायसवाल के सवाल के जवाब में लोकसभा में केन्द्रीय खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया था, ‘बिहार में 37.6 टन धातु युक्त अयस्क सहित 223 मिलियन टन स्वर्ण धातु उपलब्ध है। यह 44% है। बिहार में यह पूरा भंडार जमुई के सोनो क्षेत्र में है। देश में 1 अप्रैल 2015 तक 501.83 मिलियन टन संसाधन होने का अनुमान है। इसमें 654.74 टन स्वर्ण धातु है।’

मंत्री ने बताया कि बिहार में स्वर्ण के इन संसाधनों को संयुक्त राष्ट्र फ्रेम वर्गीकरण कोड-333 ( 21.6 टन धातु युक्त 128.88 मिलियन टन) और कोड-334 (16 टन धातु युक्त 94 मिलियन टन) के तहत श्रेणीबद्ध किया गया है। मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में GSI ने पश्चिम चंपारण व गया में प्रारंभिक सर्वे किया है, लेकिन यहां स्वर्ण की औसत सांद्रता कम है।

देश में 50 करोड़ टन भंडार
नेशनल मिनरल इंवेंटरी डाटा के मुताबिक देश में 1 अप्रैल 2015 तक स्वर्ण अयस्क का कुल भंडार 50.183 करोड़ टन है। इनमें 1.722 करोड़ टन सुरक्षित श्रेणी व शेष संसाधनों की श्रेणी में है।

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