PATNA- शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने सख्त हैं कि वो कब क्या बोल जा रहे हैं शायद उन्हें पता भी नहीं चल रहा है. अभी हाल ही में उन्होंने पटना के ज्ञान भवन में शराबबंदी को लेकर राज्य के कर्मियों को शपथ दिलाई थी. इस दिन उन्होंने बातों बातों में शराबबंदी के लिए महिलाओं के कमरे में मर्द पुलिसकर्मियों के घुसने को सही बता दिया था. उनके इस बयान पर अभी किरकिरी हो ही रही थी कि अब एक बीजेपी की महिला विधायक निक्की हेंब्रम पर टिप्पणी कर वह विवादों में फंस गए हैं.

दरअसल, बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र चल रहा है. बीते सोमवार को एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी. इसी बैठक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बीजेपी की महिला आदिवासी विधायक निक्की हेंब्रम के लिए गलत शब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगा. विधायक निक्की हेंब्रम आदिवासियों की समस्या बता ही रही थीं और शराबबंदी पर ही कुछ कह रही थीं कि नीतीश कुमार ने उन्हें बीच में ही रोक दिया. नीतीश कुमार ने खुद बोलना शुरू कर दिया और उन्होंने महिला विधायक को कह दिया कि आप इतनी सुंदर हैं, लेकिन आपको मालूम है कि आदिवासियों के लिए हमने क्या-क्या किया है. आपका विचार बिल्कुल उल्टा है. वहीं, दूसरी ओर इस पूरे मामले में एनडीए की बैठक में मौजूद कुछ विधायक और मंत्री ने ऑफ कैमरा बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा गलत नहीं थी. उन्होंने समझाने के क्रम में ऐसा कहा. गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. वहीं, विधायक निक्की हेंब्रम ने कहा कि वह आश्चर्य में हैं.

संजय जायसवाल ले रहें आलाकमान का सहारा
इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बयान के बाद विधायकों के आक्रोश को देखकर बीजेपी का प्रदेश नेतृत्व बैकफुट पर आ गया. उनके गुस्से को शातं करने के लिए बिहार बीजेपी के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने आलाकमान का सहारा लिया. संजय जायसवाल ने कहा कि वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को इस बारे में अवगत कराएंगे.

इस मामले को विस्तार से जानने के लिए सीधे एबीपी न्यूज ने विधायक निक्की हेंब्रम से गुरुवार को बातचीत की. निक्की हेंब्रम ने बताया वो आदिवासियों की समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत करा रही थीं. उन्होंने कहा, शराबबंदी कानून तो बनाई गई लेकिन हमारे यहां महुआ लाइफलाइन है. लोग इधर जंगल में रहते हैं. विषम परिस्थिति में लोग महुआ बेचते हैं. आपने (मुख्यमंत्री) शराबबंदी की है कीजिए, लेकिन महुआ पर जो आपने रोक लगाई है कि पांच किलो से ज्यादा महुआ आप घर में नहीं रख सकते हैं. इसपर विचार कीजिए.”

निक्की हेंब्रम ने कहा महुआ आदिवासी समाज के लिए लाइफलाइन है और आप उस सपोर्ट को छीन रहे हैं तो आप उसका वैकल्पिक व्यवस्था कीजिए. एमपी में शिवराज सिंह चौहान की सरकार 35 रुपये किलो महुआ खरीद रही है. आप उसी तरह से खरीदें. उससे दवाई बनाएं. लोगों को अच्छा रेट मिल जाएगा तो वो दारू क्यों बनाएगा? साथ ही उनका उत्थान भी होगा. उन्होंने कहा कि बिहार के किसी भी क्षेत्र में जितने भी आदिवासी हैं वो एक डिसाइडेड वोटर हैं. वो एनडीए के सपोर्टर हैं उनके लिए काम करना हमारा धर्म बनता है. नीतीश कुमार को मेरा विचार गलत लगा, उनके सोचने का तरीका अलग है.

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