बिहार में समीक्षा बैठक ने सियासत को गरमा दिया हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई हैं। समीक्षा बैठक के बाद कई सख्त फैसले किए गए हैं। इस बैठक में बिहार में थानेदार से लेकर चौकीदार तक और बाकी अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई हैं। मुख्यमंत्री ने अपने तमाम मंत्रियों अधिकारियों के साथ बैठक के बाद सख्ती दिखाने का फैसला किया हैं। लेकिन विपक्ष इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। दरअसल, आरजेडी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा है कि मुख्यमंत्री को समीक्षा शब्द के मायने ही नहीं पता हैं।

मनोज झा ने कहा कि समीक्षा केवल ऑप्टिकल चीज नहीं हो सकती, मनोज झा ने कहा कल 7 घंटे तक समीक्षा बैठक चली लेकिन शार्क मछलियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई, केवल छोटी मछलियां पकड़ी जाएंगी। थानेदार, चौकीदार, जमादार केवल पकड़े जाएंगे,लेकिन जो सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा है उस पर सख्ती क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि सिंडिकेट का और रसूखदार लोगों का सत्ता प्रतिष्ठान से सीधा ताल्लुक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि गरीब जेलों में बंद है अपना बेल नहीं करा सकते, लेकिन जेलों के बाहर वह लोग हैं जिनका सप्लाई चेन है और उस सप्लाई चेन पर पूरा अधिकार हैं। अलग-अलग जिलों के प्रभारी मंत्रियों को भी समीक्षा का अधिकार दिए जाने के सवाल पर मनोज झा ने कहा कि उन मंत्रियों की भी जिम्मेदारी फिक्स होनी चाहिए। जैसे थानेदार जमादार की जिम्मेदारी फिक्स की गई हैं। जैसे थानेदार निलंबित हो रहा है वैसे मंत्री जी को भी निलंबित कर दीजिए।

मनोज झा ने कहा कि आपकी नजर में भी जो बंदी है उसे पहले खत्म कर दीजिए। पहले यह तय करना होगा कि सप्लाई चैन कैसे खत्म किया जाए ? डिमांड खत्म करने से पहले सप्लाई चैन को खत्म कीजिए। इससे बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों की चित्कार थम जाएगी। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में शराबबंदी है वहां भी सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा हैं। लेकिन हमारे यहां का ऑपरेशन का लेवल बड़ा है और वह सिंडिकेट भी बड़ा हैं। मनोज झा ने सबसे पहले इसे ख़त्म करने की माँग की।

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