पटना:- नवरात्र में मोहम्मद अली नियमित रूप से मां दुर्गा की उपासना कर रहे हैं। सवा दशक पूर्व उन्होंने घुरेहरीपुर गांव में मां घुरदेवी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। चैत्र व शारदीय नवरात्र में वे नियमित रूप से ब्रह्ममुहूर्त में तैयार होकर मंदिर पहुंच जाते हैं। वे स्वयं मंदिर की सफाई व अन्य सेवाएं करते हैं। इसके बाद नियमित रूप से मां की उपासना करते हैं। तमाम सामाजिक विरोधों से जूझने के बावजूद भी वे मां की भक्ति से पीछे नहीं हटे। मंदिर परिसर में लगने वाले मेले की व्यवस्था भी वे स्वयं देखते हैं। क्षेत्रवासियों के सहयोग से पाई-पाई जोड़कर वे पास में ही बजरंगबली के भव्य मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। 52 फुट ऊंचे इस मंदिर का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा होने वाला है।

जिला मुख्यालय बहराइच से 32 किमी दक्षिण- पश्चिम घाघरा नदी के तट पर बसे ऐतिहासिक स्थल बौंडी के घुरेहरीपुर में घुरदेवी मंदिर स्थित है। लगभग चार सौ साल पूर्व यहां घुरदेवी का प्रसिद्ध मंदिर था, जहां प्रति वर्ष लगने वाले मेले में दिल्ली से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक की दुकाने आती थी। पिछले वर्षों कोरोनाकाल की वजह से मेला नहीं लगा, जिससे इस बार बाहर से दुकाने नहीं आई हैं।

मोहम्मद अली पांच वक्त के नमाजी हैं, और रमजान में रोजा भी रखते हैं। सवा दशक पूर्व जब उन्होंने घुरदेवी मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू किया तो इसका मुस्लिम समाज में व्यापक विरोध हुआ, किन्तु अब उनका विरोध करने के बजाय लोग उनके कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। घुरदेवी मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद जो धनराशि बची थी, उससे उन्होंने बजरंगबली के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू करा दिया था। क्षेत्रवासियों से पाई- पाई जोड़कर उन्होंने  20 लाख रुपये एकत्र किए। इस धनराशि से 52 फुट ऊंचे मंदिर का निर्माण करा रहे हैं, जो शीघ्र पूरा होने वाला है।

मंदिर में टाइल्स लगाने आए और मां के होकर रह गए

बहराइच। दर्जी व बिजली मिस्त्री का काम करने वाले मोहम्मद अली बताते हैं कि मंदिर निर्माण की प्रेरणा उन्हें देवी मां से ही मिली। इसमें मेरा कोई योगदान नहीं है। लगभग सवा दशक पूर्व मनौती पूरी होने पर सेठ अच्छू ने उन्हें इस मंदिर में टाइल्स लगवाने के लिए बुलाया था। वहां पहुंचने के बाद मां भगवती ने ऐसा हाथ पकड़ा कि उस दिन से मैं उन्हीं का होकर रह गया। शुरुआती दिनों में तो खूब विरोध हुआ, किन्तु जब लोगों ने महसूस किया कि यह हिलने वाले नहीं है, तो लोगों ने सहयोग करना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि मां की प्रेरणा से हिन्दू व मुसलमान दोनों समुदाय के लोगों से उन्होंने बेझिझक घर- घर जाकर गेहूं इकट्ठा कर सहयोग जुटाया। जिससे उस समय 10 लाख रुपये की लागत से मां के इस मंदिर को वर्तमान स्वरूप मिल सका।  निर्माण कराया।

हनुमान गढ़ी की तर्ज पर करा रहे हनुमान मंदिर का निर्माण

बहराइच। वृद्ध मातेश्वरी घुरदेवी मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहम्मद अली बताते हैं कि वर्ष 2007 से गेहूं की फसल तैयार होने पर पूरे इलाके से दान स्वरूप कुछ अंश प्राप्त कर मां घुरदेवी की प्रेरणा से मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ। इसके बाद बजरंगबली के मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया। 52 फुट ऊंचा यह मंदिर लगभग 20 लाख की लागत बनाया जा रहा है जिसका निर्माण कार्य पूरा होने वाला है। यहां के लोगों की ऐसी मान्यता है कि मां को चढ़ने वाला नीर आंखों में डालने से नेत्र रोगों में आराम मिलता है। लोग पुत्र प्राप्ति के लिए भी यहां पूजा करने आते हैं।

क्षेत्रवासियों ने सीएम से की अपील

बहराइच। मोहम्मद अली देवी मां की सेवा के माध्यम से मानवता की सेवा को अपना कर्तव्य समझते हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र के अवसर पर वे तड़के चार बजे तैयार होकर मंदिर पहुंच जाते हैं। साफ सफाई के बाद मां की आराधना करते हैं। इसके बाद मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू होता है। मां के किसी भक्त को कोई तकलीफ न हो, इसका वे पूरा ख्याल रखते हैं। सभी भक्तों से मंदिर खाली होने पर रोज रात 11 बजे के बाद वे घर लौटते हैं। ये सिलसिला वर्षों से चल रहा है। वे हिन्दू- मुस्लिम का कोई भेद नहीं मानते हैं। उनकी नजरों में दोनों मजहब के मानने वाले उस बनाने वाले के बन्दे हैं। मानवता के लिए किए जा रहे उनके कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से उन्हें सम्मानित करने की मांग की है।

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