पटना :- राजधानी पटना के बोरिंग रोड स्थित सुप्रसिद्ध इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ एवं दिव्य वात्सल्य ममता फर्टिलिटी सेन्टर प्रा. लिकी निदेशिका डॉ. रश्मि प्रसाद ने कहा कि आईवीएफ तकनीक भारत में बहुत वर्षों से प्रचलन में है । यह उपचार बांझपन के लिए होता है। भारत में बहुत तेजी से चिकित्सा क्षेत्रा में इस तकनीक का उपयोग हो रहा है। पूरे विश्व से लोग आईवीएफ के लिए भारत आ रहे हैं ।

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. रश्मि प्रसाद ने कहा कि आईवीएपफ का पूरा नाम इन-विंट्रो फर्टिलाइजेशन है। यह एक सहायक प्रजनन तकनीक है। इस तकनीक से बच्चा पैदा करने में असमर्थ महिलाओं को गैर-प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण कराया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि पति या पत्नी किसी में कोई विकार हो सकता है, जिसके कारण बच्चा पैदा करने में मुश्किल आ सकती है। बांझपन महिला और पुरुष दोनों में हो सकता है ।

एशिया ग्रेटेस्ट ब्रांड्स एण्ड लीडर्स के अवार्ड से सम्मानित डॉ. रश्मि ने दावा किया कि आईवीएफ तकनीक से बांझपन से पीड़ित महिलायें भी बच्चा पैदा कर सकती हैं। जिन महिलाओं ने अपनी फेलोपियन ट्यूब निकलवा दी है या फिर किसी अन्य खराबी के कारण उनकी फेलोपियन ट्यूब अंडा पैदा करने योग्य नहीं है, इन महिलाओं को गैर-प्राकृतिक तरीके से गर्भधरण कराया जाता है। महिला के अंडे को प्रयोगशाला की डिश में गैर-प्राकृतिक तरीके से पुरुष शुक्राणुओं से संयोजन कराया जाता है।

इस विधि से जब भ्रूण तैयार हो जाता है, तो उसे महिला की बच्चेदानी में रख दिया जाता है। इस तरह महिला गर्भवती होकर बच्चे को जन्म दे सकती है। डॉ. रश्मि ने आगे कहा कि आईवीएफ तकनीक के चार महत्त्वपूर्ण कदम होते हैं, जिसके हिसाब से महिलाओं का उपचार किया जाता है। सर्वप्रथम मरीज के खून के सैंपल लिये जाते हैं, जिससे यह पता लगाया जाता है कि मरीज के शरीर में हार्मोंस किस स्तर पर है। अगर हार्मोंस का स्तर उपर नीचे होता है, तो उन्हें दवाओं की सहायता से नियंत्रित किया जाता है । उसके बाद मरीज को प्रजनन की दवाइयां और हार्मोंस दिये जाते हैं, जिससे उनके अंडकोष में नए अंडे बनने शुरू हो जाते हैं। वहां से अंडों को निकालकर परखनली में स्टोर किया जाता है। अंडों की गिनती एक से ज्यादा रखी जाती है। जब अंडे पक कर तैयार हो जाते हैं, तो अल्ट्रासाउण्ड की मदद से बाहर निकाला जाता है।  अंडे निकलने के बाद महिला के पति या फिर सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले वीर्य लेकर रखा जायेग फिर प्रयोगशाला में भ्रूण बनने की प्रक्रिया की जाती है। पूरी तरह तैयार भ्रूण को महिला की बच्चेदानी में रखा जाता है। अब महिला निश्चित समय पर मां बन सकेगी ।

देश की सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ विशेषज्ञ एवं बिहार आईकॉन से सम्मानित डॉ. रश्मि ने कहा कि यह बेहद सुरक्षित एवं विश्वसनीय तकनीक है, उनके सेन्टर पर आईवीएफ के लिए सभी प्रकार की नवीनतम तकनीक एवं सुविध मौजूद है। वह स्वयं सैंकड़ों महिलाओं का इस तकनीक से गर्भधारण करा चुकी है। आईवीएफ के बारे में किसी प्रकार की जानकारी मोबाइल नं.-8051761659, 9771038137 पर प्राप्त की जा सकती है।

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